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13 मार्च 2011

भ्रष्टाचार एक राष्ट्रव्यापी समस्या


भ्रष्टाचार पर परिचर्चा और पोस्टर प्रदर्शनी

13 मार्च, रविवार। दख़ल विचार मंच के तत्वावधान में भ्रष्टाचार पर केन्द्रित परिचर्चा और पोस्टर प्रदर्शनी स्थानीय फूलबाग स्थित गांधी प्रतिमा पर आयोजित की गयी। परिचर्चा में भागीदारी करते हुए दख़ल के संयोजक अजय गुलाटी ने कहा कि आज भ्रष्टाचार एक राष्ट्रव्यापी समस्या बन चुकी है लेकिन इसको लेकर जितने भ्रम फैलाये गये हैं उन्होंने इसे उलझाकर रख दिया है। देश के बाहर रखे काले धन पर बात हो रही है लेकिन देश के भीतर के अकूत काले धन पर सब चुप हैं। सी पी आई के राजेश शर्मा ने कहा कि मज़ेदार बात यह है कि वह लोग भी भ्रष्टाचार पर आंदोलन कर रहे हैं जो खुद इसमें आकंठ डूबे हुए हैं।

स्त्री अधिकार संगठन की सुश्री किरण ने कहा कि कुछ एक लोगों के सुधरने से भ्रष्टाचार ख़त्म होने वाला नहीं। यह व्यवस्था से जुड़ा मसला है। डा जितेन्द्र विसारिया ने कहा कि यह समस्या सीधे-सीधे आर्थिक व्यवस्था से जुड़ी हुई है। नई आर्थिक नीतियों के आने के बाद से ही इस समस्या ने विकराल रूप ले लिया है। अमित शर्मा ने कहा कि आज ज़रूरत इसकी जड़ों पर प्रहार करने की है। इंप्लाईज एसोशियेशन के एम डी शर्मा ने कहा कि आज मज़दूर आंदोलन को तेज़ करना होगा और इस मुद्दे को आमजन के बीच ले जाना होगा। डा अशोक चौहान ने कहा कि पूरे अरब जगत में जो परिवर्तन की लहर चली है भारत भी उससे अछूता नहीं रह सकता। वीरेन्द्र चोपड़ा ने कहा कि जो हज़ारों करोड़ के घोटाले हुए हैं वह किसी पूंजीपति के नहीं आम जनता के पैसे हैं। कार्यक्रम का संचालन करते हुए अशोक पान्डेय ने अगले महीने इस समस्या को लेकर व्यापक अभियान चलाने तथा एक पब्लिक मीटिंग करने का प्रस्ताव रखा जिसे सर्वसम्मति से स्वीकार कर लिया गया।

इस अवसर पर एक पोस्टर प्रदर्शनी भी लगाई गयी जिसमें भ्रष्टाचार और काले धन के विभिन्न पहलूओं को उजागर किया गया था। बड़ी संख्या में लोगों ने इस प्रदर्शनी को देखा और इससे सहमति जताई।


05 फ़रवरी 2011

कविता समय





आगामी 25-26 फरवरी को ग्वालियर में  दख़ल विचार मंच तथा प्रतिलिपि पत्रिका के सहयोग से समकालीन कविता पर केन्द्रित एक राष्ट्रीय संगोष्ठी ‘कविता समय’ का आयोजन  पड़ाव स्थित कला वीथिका में  किया जा रहा है। कविता का यूटोपिया और संकटविषय पर केन्द्रित इस आयोजन में देश भर के कवि तथा आलोचक हिस्सा लेंगे। देश भर में अपनी तरह के इस अनूठे दो दिवसीय आयोजन में नामवर सिंह, अशोक बाजपेयी, ज्ञानेन्द्रपति, आलोक धन्वा, वीरेन डंगवाल, अरुण कमल, नरेश अग्रवाल, राजेश जोशी, असद जैदी, कुमार अंबुज, लीलाधर मंडलोई, मदन कश्यप, बोधिसत्व, जितेन्द्र श्रीवास्तव,  गिरिराज किराडू, पंकज राग, गीत चतुर्वेदी सहित चालीस से अधिक कवि तथा आलोचक हिस्सेदारी करेंगे। इस दौरान न केवल समकालीन कविता की चुनौतियों तथा संकटों पर गहन विचार विमर्श होगा अपितु 25 से अधिक कवियों का विभिन्न सत्रों के काव्यपाठ भी होगा। ज्ञातव्य है कि ग्वालियर से शुरु हो रही यह शृंखला प्रतिवर्ष अलग-अलग शहरों में आयोजित होगी।

इस आयोजन के दौरान शहर के युवा कलाकारों के लिये कविता पोस्टर की एक कार्यशाला जाने-माने कलाकार विनय अम्बर (जबलपुर) तथा पंकज दीक्षित (अशोकनगर) के निर्देशन में संपन्न होगी तथा इन कलाकारों की कविता पोस्टर प्रदर्शनियाँ भी लगाई जायेंगी। इसके अलावा शिल्पायन प्रकाशन, दिल्ली तथा प्रतिलिपि प्रकाशन, जयपुर अपनी पुस्तकों की प्रदर्शनियाँ भी लगायेंगे और जयपुर के जाने-माने युवा पेंटर तथा कवि अमित कल्ला कविता आधारित पेंटिग्स का प्रदर्शन भी करेंगे। 

25 सितंबर 2010

ये वक़्त की आवाज़ है…

एक फैसला टल जाने से कुछ नहीं बदला…हवा में ज़हर की गंध बख़ूबी पहचानी जा सकती है…बशर्ते सड़क पर निकला जाय। कोर्ट के फैसले के बाद माहौल विषाक्त बनाने की कोशिशें फिर एक बार की जायेंगी…ऐसे में जनपक्षधर ताक़तों की ज़िम्मेदारी बनती है कि माहौल में घुले ज़हर को न केवल पहचाने बल्कि उसे साफ़ करने की कोशिश भी करें। इसी ज़िम्मेदारी को निभाने के लिये दख़ल विचार मंच ने पहले एस एम एस अभियान से जनता को जागरूक करने की कोशिश की और अब 27 तारीख़ को शहीदे आज़म भगत सिंह के जन्मदिवस पर 'क़ौमी एकता दिवस' मनाने के लिये पहल की है।


हमारी इस पहल पर शहर के बीमा कर्मचारी यूनियन, ग्वालियर यूनाईटेड काउंसिल आफ़ ट्रेड यूनियन्स, जलेस, प्रलेस, स्त्री अधिकार संगठन, आल इण्डिया लायर्स एसोशियेसन, संवाद, एटक, मध्य प्रदेश मेडिकल रिप्रेजेन्टेटिव यूनियन आदि संगठनों ने संयुक्त रूप से शहर के मध्य में स्थित फूलबाग़ के गेट पर शाम 6 बजे से एक आम सभा करने और शहर से शांति तथा धार्मिक सद्भाव बनाये रखने तथा सांप्रदायिक शक्तियों के मंसूबे नाकाम करने की अपील की है।

अगर आप उस दिन ग्वालियर में हैं…तो इस कार्यक्रम में ज़रूर शामिल हों

03 सितंबर 2010

इस नई शुरुआत में हमें आपका सहयोग चाहिये!




युवा दख़ल ब्लाग के सभी पाठकों को हमें यह सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि ग्वालियर की इकाई ने ख़ुद को पुनर्गठित किया है। लम्बे बहस-मुबाहिसे के बाद हमने 'दख़ल विचार मंच' के नाम से ख़ुद को पुनर्गठित किया है। यह मंच स्थानीय स्तर पर प्रगतिशील समाजवादी विचारों की स्थापना तथा प्रचार-प्रसार का काम करेगा। 'ख़ुद को बेहतर बनाते हुए दुनिया को बेहतर बनाने की कोशिश' अब भी हमारा केन्द्रीय नारा है और उद्देश्य 'चुप्पी के माहौल में संवाद बनाने की कोशिश'।

इस मंच का संयोजक अजय गुलाटी को चुना गया है जबकि संयोजन समिति में उनके अलावा जितेन्द्र बिसारिया और किरण होंगे। कोष की जिम्मेदारी ज्योति कुमारी की होगी तथा पत्रिका के व्यवस्थापक होंगे राजवीर राठौर।


अब तक हम केवल युवाओं पर केन्द्रित थे लेकिन अब हमने सभी आयुवर्ग के लोगों को अपने साथ जोड़ने तथा विभिन्न विषयों पर गंभीर बहस-मुबाहिसे की योजना बनाई है। इसकी पहली कड़ी के रूप में हर माह के प्रथम रविवार को किसी सार्वजनिक स्थल पर अध्ययन चक्र चलाने का निर्णय लिया गया है।



युवा दख़ल

के प्रकाशन का निर्णय



साथ ही इस मंच के मुखपत्र के रूप में युवा दख़ल बुलेटिन को नियमित रूप से त्रैमासिक निकालने का भी निर्णय लिया गया है। इसकी पृष्ठ संख्या 16 होगी और मूल्य मूल्य 5 रुपये। इसका आगामी अंक नागार्जुन, शमशेर, केदार नाथ अग्रवाल तथा फैज अहमद फैज के जन्मशताब्दी के अवसर पर जन कविता अंक होगा। जो साथी इसमे सहयोग करना चाहते हैं इनमें से किसी कवि पर आधारित अपना लघु आलेख भेज सकते हैं। साथ ही पत्रिका की वार्षिक सहयोग राशि रु 25/-भेजकर भी आप हमारा सहयोग कर सकते हैं।