01 जनवरी 2009

नये साल ऑर क्यूबा की क्रान्ति की ५० वी वर्षगाँठ पर


जलाओ चाँद सितारे चिराग काफ़ी नहीं
ये शब है जश्न की शब रोशनी ज़्यादा रहे
दुआ के हाथ उठाओ के वक़्ते नेक आये
रुख ए अज़ीज पे महकी है उम्र ए रफ़्ता भी
उठाओ हाथ के ये वक़्त खुश मुदाम रहे
ऑर इस चमन में बहारो का इन्तेज़ाम रहे।

नववर्ष की शुभ कामनाओ सहित
अशोक कुमार पाण्डेय

(यह मुझे मेरे दोस्त भाई मुकुल ने एस एम एस से भेजा था)

2 टिप्‍पणियां:

दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi ने कहा…

"नये साल ऑर क्यूबा की क्रान्ति की ५० वी वर्षगाँठ पर"
आप को बहुत बहुत बधाइयाँ!

Bahadur Patel ने कहा…

"क्यूबा की क्रान्ति की ५० वी वर्षगाँठ पर"
नये साल पर आप को बधाइ.