23 अक्तूबर 2009

सफ़र ही मंज़िल है








लौट आया…वैसे बुद्धु हो या होशियार लौट के घर तो आता ही है।


क्या जगह है सिक्किम! इतनी प्यारी, इतनी आत्मीय,इतनी ख़ूबसूरत। ख़ुद को ही आदर्श मानने वाले हम कितना कुछ सीख सकते हैं उनसे। सबसे पहले तो यही कि ज़मीन कब्ज़ा करने से दिल कब्ज़ा नही होते। समझ ही नही आया कि क्या कहूं जब गंगटोक के उस टैक्सी वाले ने कहा -' ७४ तक हम आजाद थे...न सेना दिखाती थी...न हथियार..फिर इण्डिया ने हमें अपने नीचे कर लिया...

पर कानून का सम्मान करना खूब आता है इन्हे... ज़रा एमजी रोड पर सिगरेट तो जलाईये! पाँच सौ पांच की सिगरेट का मज़ा मिलेगा!!!


आराम से लिखूंगा कभी...शायद...अभी तो डूबा हुआ हूँ उन पहाडों में।

8 टिप्‍पणियां:

अविनाश वाचस्पति ने कहा…

होशियार कभी लौट कर नहीं आते
और आते भी हैं तो खाली हाथ नहीं आते

आते ही खूब बढ़ी पोस्‍ट लिखते लगाते हैं

आपने तो मनभावन चित्रों से ही काम चला लिया है।


आप तो वास्‍तव में ही होशियार हैं।

शरद कोकास ने कहा…

बहुत खूबसूरत तीनो तस्वीरें । पहली दो जैसी तो कहीं कहीं देखी है लेकिन यह तीसरी जिसमे आप सपरिवार है सच्मुच अद्भुत है इसे देखकर ही लग रहा है कि यात्रा का लुत्फ उठाया गया है .. अब आराम के बाद पहली फुर्सत मे लिख डालो यात्रा वृतांत ताकि हम लोग भी कल्पना का सहारा लेकर कुछ भ्रमण कर ले.. बस बाद में यात्रा व्यय मे हिस्सा मत मांगना ।

अविनाश वाचस्पति ने कहा…

@ शरद कोकास


हिस्‍सा क्‍यों मांगेंगे

जब मांगेंगे तो

पूरा ही क्‍यों न मांगेंगे ?

vijay gaur/विजय गौड़ ने कहा…

सुंदर तस्वीरें हैं भाई।

दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi ने कहा…

शरद जी ने तीन तस्वीरें देखी। हमें दो ही दिखाई दे रही हैं। पहली कहाँ है।

श्रीश पाठक 'प्रखर' ने कहा…

भैया तुम घूम लिए, बहुतै बधाई...

साहिल ने कहा…

chalo achchha hai, ghoom aaye
warna is bhag-bhag dour me fursat milna mushqil hota hai....

रवि कुमार, रावतभाटा ने कहा…

फिर इंड़िया ने हमें नीचे कर लिया...
काफ़ी कुछ कह दिया है...

आप आराम से आराम कर सकते हैं...

हम सोच रहे हैं, हम भी थकान ले आएं...