24 जुलाई 2009

एक क्रांतिकारी के प्रेम पर कुछ विचार




( चेग्वेरा की एक किताब का अनुवाद करते हुए एक दूसरी किताब, क्यूबा में समाजवाद और व्यक्ति, के ये उद्धरण सामने आये। प्रेम पर उनके ये विचार एक मनुष्य के तौर पर उनकी उदात्तता और एक क्रांतिकारी के तौर पर उनके एकनिष्ठ समर्पण को रेखांकित करते हैं)



हर क्रांतिकारी प्रेम की तीव्र भावना से संचालित होता है। ऐसे सच्चे क्रांतिकारी की कल्पना करना असंभव है जिसमें इस गुण का अभाव हो। किसी नेतृत्वकर्ता के सामने सबसे बडी चुनौती यही होती है कि उसे उत्साहसिक्त भावनाओं को शांत मष्तिष्क के साथ संयोजित करना होता है और चूके बिना सही निर्णय लेने होते हैं।


''हमारे हिरावल क्रांतिकारियों के मन में जनता तथा सबसे पवित्र उद्देश्यों के लिये जो प्रेम है उसे वही अविभाज्य प्रेम होना चाहिये। सामान्य लोगों द्वारा प्रदर्शित प्रेम के भोंडे प्रदर्शन उनके लिये नहीं होते।''


क्रांतिकारी नेता बारहां अपने बच्चों के पहले तोतले शब्द सुनने के लिये उपस्थित नहीं होते, क्रांति अपने लक्ष्य तक पहुंच सके इसके लिये उनकी पत्नियों को भी उनकी क़ुर्बानियां साझा करनी होती हैं, उनके दोस्त केवल क्रांतियुद्ध के कामरेडों में ही पाये जाते हैं।उनके लिये इंक़लाब से बाहर कोई ज़िंदगी नहीं होती। अगर उन्हें सैद्धांतिक अतियों, बांझ बौद्धिकता और जनता से अलगाव से बचना है तो उनमें अगाध मानवीयता और न्याय तथा सत्य का बोध होना आवश्यक है। यही उनका रोज़ ब रोज़ का वह संघर्ष है जो जीवित मानवता के लिये उनके प्रेम को ठोस कार्यभारों और ऐसे कामों मे परिणित करेगा जो लोगों को इंक़लाब के रास्ते पर आगे बढायेगा और एक शानदार उदाहरण पेश करेगा।

10 टिप्‍पणियां:

दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi ने कहा…

बहुत सुंदर उद्धरण हमेशा स्मरण रखने लायक।

Ashok Pande ने कहा…

अगर उन्हें सैद्धांतिक अतियों, बांझ बौद्धिकता और ... जनता से अलगाव से बचना है तो उनमें अगाध मानवीयता और न्याय तथा सत्य का बोध होना आवश्यक है। यही उनका रोज़ ब रोज़ का वह संघर्ष है जो जीवित मानवता के लिये उनके प्रेम को ठोस कार्यभारों और ऐसे कामों मे परिणित करेगा जो लोगों को इंक़लाब के रास्ते पर आगे बढायेगा और एक शानदार उदाहरण पेश करेगा।

... बढ़िया हिस्सा लगाया आपने भाई!

रवां अनुवाद.

उत्तम पोस्ट!

varsha ने कहा…

हर क्रांतिकारी प्रेम की तीव्र भावना से संचालित होता है।

रंगनाथ सिंह ने कहा…

ashok ji ne jis hisse ko upar quote kiya us hisse ko padh kar mai bhi use quote karna cchahta tha....

nischay hi anuvad behtarin h....

शरद कोकास ने कहा…

स्पष्ट है कि जो प्रेम नहीं कर सकता वह क्रांति भी नहीं कर सकता . राजेश जोशी ने कहा है एक अच्छी प्रेम कविता विरोध की कविता से ज्यादा ताकतवर होती है

रवि कुमार, रावतभाटा ने कहा…

प्रेम का विस्तार ही ऐसे सामाजिक सरोकार पैदा कर सकता है...

अच्छा लगा...

महेश वर्मा ने कहा…

क्रांतिकारी नेता बारह अपने बच्चों के पहले तोतले शब्द सुनने के लिए उपस्थित नहीं होते ...
सधा हुआ और प्रासंगिक अनुवाद . अशोक भाई अब अनुवाद को ज्यादा गंभीरता से ले रहे हैं . बधाई और शुभकामनाएं .

' मिसिर' ने कहा…

हमारे लक्ष्य जितने महान होंगे ,प्रेम उतना ही उदात्त होगा !
एक समर्पित क्रांतिकरी ही सच्चा प्रेमी हो सकता है ,प्रेम पर
तर्कपूर्ण विचार और चर्चा करने वाला मीमांसक नहीं !
कामरेड चेग्वेरा को लाल सलाम !

रवि कुमार, रावतभाटा ने कहा…

हर क्रांतिकारी प्रेम की तीव्र भावना से संचालित होता है...उसे उत्साहसिक्त भावनाओं को शांत मष्तिष्क के साथ संयोजित करना होता है...

चे-ग्वारा की प्रतिबद्धता बेमिसाल है...

अनहद/aNHAD ने कहा…

उम्दा पोस्ट... अच्छा लगा...