05 जून 2009

वे ज़हर खाकर मर जायेंगे

शरद यादव पुराने लोहियावादी हैं अब आडवानी जी की गोद में बैठे हैं तो का हुआ भाषण देना थोड़े भूल गए। आज संसद में बोलते हुए फार्म में आये तो महिला आरक्षण का विरोध करते हुए बोल गए की ज़हर खा लूँगा अगर यह लागू हो गया यह।
का करें बिचारे इतनी महिलओं को संसद में देखकर लगता है बौरा गए हैं । कहां सोचा था की आडवानी की सरपरस्ती में मंत्री बनकर मलाई चाभेंगे और कहाँ दूसरी बार बैठाना पद रहा है विपक्ष में। ऊपर से बिहार की ही मीरा कुमार बन गयीं सभापति। अब जाति के भरोसे राजनीति के कमज़ोर होने का अहसास हो रहा है तो बेकल होना स्वाभाविक है। और बेकली में ही तो नंगे होते हैं लोग।
आप बताइये आप क्या करेंगे और कहेंगे महिला आरक्षण बिल के पास होने पर ?

11 टिप्‍पणियां:

महामंत्री - तस्लीम ने कहा…

काश, इतनी गैरत भी होती।
-Zakir Ali ‘Rajnish’
{ Secretary-TSALIIM & SBAI }

उपाध्यायजी(Upadhyayjee) ने कहा…

dekhiye Sharad yadav ka baurana vajib hai. Maximum log Bihar me vikas ke mudde par jita hai. Lekin Sharad Yadav vikas nahin balki jaati (Yadav) ke naam par Madhepura se jeete hain. Eesliye rah rah kar oonko BJP se chidh ho rahi hai. Dusara wo chah rahe hain ki JDU ka khel bigada jaaye, akele akele Nitish kumar raaj kar rahe hain. NDA me rahne par kewal Nitish maja lenge aur oo huan Dilli me vipaksh me baithenge. Agar ees paar se oos paar ho gaye to Sharad yadav huan dilli me malai chabhenge aur nitish vipaksh me Bihar me. :)

Waise mahila bill rajniti se prerit hai. Mahila ke naam par Rabri type mahilayen panchayat ke hakdar ho gayee hain. Oonke patidev jo kahte hain wahi karti hain. Ek sudridh, Shikshit samaj ko lekar chalne ki jaroorta hai naa ki majboori me kisi ko bhi kisi ke oopar thopane ki. Agar mahilayen saksham hain to janta chunengi oonko aur koi rok nahin sakta. ye Thopane waali reservation kewal hindustan me hi hota hai.

Mired Mirage ने कहा…

क्या कहेंगे, यही कि जहर में भी मिलावट थी।
घुघूती बासूती

अशोक कुमार पाण्डेय ने कहा…

उपाध्याय जी
यह थोपना क्या होता है? सारे मंदिरों की पुजारी की पोस्ट बाभनों के लिये, सफ़ाई दलितों के लिये और चूल्हा चौका महिलाओं के लिये क्या यह आरक्षण नहीं है?
आपको राबडी दिखती हैं पर रेणुका चौधरी नहीं। शरद जी से अलग पर दृष्टिदोष आपका भी कम भयानक नहीं।

श्यामल सुमन ने कहा…

उनकी खुद की ख्वाहिश है - कोई रोक सकता है क्या?

सादर
श्यामल सुमन
09955373288
www.manoramsuman.blogspot.com
shyamalsuman@gmail.com

आशेन्द्र सिंह ने कहा…

संसद में एक चूहामार दवाई की दुकान भी खुलनी चाहिए. इस में ब्रांडेड और असर कारक दवाइयाँ मिलें. वैसे गरजने वाले बादल कभी बरसते नहीं

अशोक कुमार पाण्डेय ने कहा…

inhen khane deejiye zahar...

varsha mirza

विवेक ने कहा…

वैसे शरद यादव की बात मान ली जाए और महिला आरक्षण के भीतर जाति आधारित आरक्षण दे दिया जाए...तो हर्ज क्या होगा?

रंजन ने कहा…

जल्दी पास करवा दो कहीं वे अपना इरादा न बदल दें..

अशोक कुमार पाण्डेय ने कहा…

विवेक जी
आरक्षण के भीतर आरक्षण से कम से कम हमें तो कोई एतराज़ नहीं। पर लगता है कि पक्ष और विपक्ष दोनों ने इसे टालते रहने का बहाना ढूंढ लिया है।
बाकी आरक्षण बिल बिना बहस के पास हो जाते हैं तो इस पर इतना बवण्डर क्यों? साफ़ है औरतों को अधिकार कोई नहीं देना चाहता।

Shiv ने कहा…

bahut khoob likha hai aap logo ne.