13 अप्रैल 2011

भ्रष्टाचार पर खुली बहस


कार्टून यहाँ से साभार


साथियों,

भ्रष्टाचार का मुद्दा कोई नया नहीं है। पिछले दिनों इसे लेकर देश भर में जो आंदोलन हुआ उससे आप सब परिचित हैं। इसके पहले जयप्रकाश जी के नेतृत्व में चला संपूर्ण क्रांति का आंदोलन और फिर विश्वनाथ प्रताप सिंह के नेतृत्व में चला आंदोलन भी मूलतः भ्रष्टाचार के ही ख़िलाफ़ था। लेकिन इन तमाम आंदोलनों के बावज़ूद देश के भीतर यह बीमारी बढ़ती ही चली गयी और अब प्रस्तावित लोकपाल बिल के बाद यह पूरी तरह से ख़त्म हो जायेगी, यह विश्वास तो इसके नेतृत्वकर्ताओं को भी नहीं है। आख़िर ऐसा क्यूं है कि तमाम सारी कोशिशों के बावज़ूद भ्रष्टाचार कम होने के बजाय बढ़ता ही चला जा रहा है?

इसके साथ ही यह सवाल भी अनिवार्य रूप से जुड़ा हुआ है कि आख़िर यह भ्रष्टाचार है क्या? क्या इसे सिर्फ़ किसी सरकारी कर्मचारी द्वारा लिये जाने वाली रिश्वत तक सीमित करके देखा जा सकता है? क्या भ्रष्टाचार का मतलब सिर्फ़ आर्थिक भ्रष्टाचार है? क्याहम सुधरेंगे-जग सुधरेगाजैसी बातों से भ्रष्टाचार दूर हो सकता है या फिर यह हमारी राजनैतिक-आर्थिक व्यवस्था से जुड़ा हुआ सवाल है?

तमाम अर्थशास्त्रियों ने यह स्पष्ट लिखा है कि जिन देशों में नई आर्थिक नीतियाँ लागू हुईं उनमें
भ्रष्टाचार तेज़ी से बढ़ा। अपने देश में हुए सत्यम घोटाले से हम सब परिचित हैं लेकिन इसके काफ़ी पहले अमेरिका में एनरान में ऐसा ही घोटाला हो चुका था। क्या सत्यम का खातों के साथ छेड़छाड़ भ्रष्टाचार की श्रेणी में नहीं आता है? पूंजीपतियों की अंधी लूट, गरीबों और आदिवासियों की ज़मीनों पर कब्ज़ा, समाज में बढ़ती जा रही हिंसा जैसी चीज़ें क्या भ्रष्टाचार से ही जुड़ी नहीं हैं?

इन सब सवालों से जूझने के लियेदख़ल विचार मंचने आगामी 17 अप्रैल, रविवार को पड़ाव स्थित कला वीथिका में दिन में एक बजे से एक ख़ुली बहस का आयोजन किया है। इसमें डा ब्रह्मदेव शर्मा तथा युवा संवाद पत्रिका के संपादकसामाजिक कार्यकर्ता डा के अरुण मुख्य रूप से भागीदारी करेंगे। आप सब से हमारा आग्रह है कि इस बहस में हिस्सेदारी करें जिससे इस सवाल पर बेहतर तरीके से समझ बनाते हुए ज़रूरी दख़ल किया जा सके।


सादर
संयोजन समिति, दख़ल विचार मंच
संपर्क – 09425787930, 09039968068

4 टिप्‍पणियां:

प्रज्ञा पांडेय ने कहा…

swaagat yogya hai . thathaastu.

दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi ने कहा…

इस विषय पर बहस आवश्यक है।

आशुतोष कुमार ने कहा…

किस शहर में , कहाँ ?

' मिसिर' ने कहा…

स्वागत ! आशा है कि बहस ईमानदारी से होगी और कोई फैसला लायेगी ,
और उस फैसले से पूरा राष्ट्र अवगत होगा ,ताकि एस मुद्दे पर जनता को
एक साथ जागरूक और सक्रिय किया जा सके !