25 अप्रैल 2009

मोदी , माफी और मज़बूती

देश के पी एम् इन वेटिंग नंबर दो नरेन्द्रमोदी को गुजरात दंगो में माफी जैसा कुछ नही लगता। क्यूँ लगे इतने दिनों संघ के गुरुकुल में जो सीखा था वही तो किया था उन्होंने! फिर काहे की माफी? आख़िर मुसलमानों की ह्त्या कराने या करने में पाप जैसा क्या है? और संविधान को तो बहुत पहले गुरूजी उर्फ़ गुरुघंटाल खारिज कर चुके थे और उनकी मांग तो मनु स्मृति को संविधान बनने की थी जिसमे सवर्णों के अलावा किसी की भी ह्त्या जायज़ है।

माफी माँगने के लिए मज़बूत कलेजा और सिद्धांतो के प्रति गहन निष्ठा की ज़रूरत होती है। जिन लोगो ने आज़ादी के समय अंग्रेजों की चाकारी की हो आज़ादी के बाद गांधी sह्त्या, फिर बैन लगाने पर चाटुकारिता और मौका मिलते ही नफरत फैलाने के इकलौते एजेंडे पर चलते हुए सेठ साहूकारों की सेवा की हो उनसे ऎसी उम्मीद नही की जा सकती।

उन्हें तो बस सज़ा ही दी जा सकती है जो समय देगा ही!!

12 टिप्‍पणियां:

महेन्द्र नेह, कोटा ने कहा…

भाई पाण्डे जी,
आप का मोदी का मूल्यांकन बेहद सटीक और ऐतिहासिक महत्व का है। जब अडवाणी या मोदी जैसे लोग संकीर्ण और तालिबानी लोग भारत के प्रधानमंत्री बन जाएंगे वह भारतीय जनतंत्र के लिए दुर्भाग्यपूर्ण और काला दिन होगा। लेकिन भारतीय जनता इन्हें वहाँ स्वीकार नहीं करने वाली।

महेन्द्र नेह, कोटा ने कहा…

भाई पाण्डे जी,
आप का मोदी का मूल्यांकन बेहद सटीक और ऐतिहासिक महत्व का है। जब अडवाणी या मोदी जैसे लोग संकीर्ण और तालिबानों जैसी मानसिकता के लोग भारत के प्रधानमंत्री बन जाएंगे वह भारतीय जनतंत्र के लिए दुर्भाग्यपूर्ण और काला दिन होगा। लेकिन भारतीय जनता इन्हें वहाँ स्वीकार नहीं करने वाली।

बेनामी ने कहा…

bahut sahi kaha aapne..

अविनाश वाचस्पति ने कहा…

ऐसे वेटिंग में रहने वालों का

नहीं होता है वेट

इसमें जो इंग जुड़ा होता है

वही जिंदगी भरा वेटिंग बना रहता है।


इनका जो आकलन किया है आपने

वो जनमानस के मन में बसा है

बस आपने निकाल बाहर रखा है

इनकी सजा यही है कि ये सब

और इनके जैसे अब

वेटिंग में ही खड़े रहें जब तक

पत्‍थर न हो जाएं जब तक

ये उपर से भी, अपने मन के माफिक।

कपिल ने कहा…

अशोकजी, अच्‍छा लिखा है। वैसे ब्‍लॉग पर संघियों के सुनियोजित, संगठित नेटवर्क के खिलाफ सामूहिक प्रयास की जरूरत है।

बेनामी ने कहा…

धत्त। बौराय गवा है का?

Babli ने कहा…

पहले तो मैं आपका तहे दिल से शुक्रियादा करना चाहती हूँ की आपको मेरी शायरी और स्केच दोनों पसंद आई!
बहुत ही शानदार लिखा है आपने!

progressive youth foundation ने कहा…

excellent comment....

varsha ने कहा…

माफी माँगने के लिए मज़बूत कलेजा और सिद्धांतो के प्रति गहन निष्ठा की ज़रूरत होती है। sahi kaha aapne.

neera ने कहा…

Well said! Truth-to the point!

बेनामी ने कहा…

unhe kya kahoge jinho ne CHINA WAR ke time me khuleaam China ka sath diya tha aur Chinise flag ke sath Bharat ke sarjami par pardarshan kiya tha...........
Aur unhe jinho ne 84 me Sikkho ka samuhik sanhar kiya...........
Bahi mere. politicians ke jaisa kewal Muslimo ka rona mat rowo ya phir apne ko Activist mat kaho politician kaho.........

अशोक कुमार पाण्डेय ने कहा…

कुछ चीज़ें मैं कभी नहीं समझ पाया।
ये लोग हमेशा एनानिमस बन कर पर्दे में क्यों आते हैं? साफ़ है इनमें अपनी पहचान बताने का भी आत्मविश्वास नहीं है।

सिख दंगों का जहां तक सवाल है तो भाई कांग्रेस इस पर सीधे माफ़ी मांग चुकी है। वैसे संघ के देशमुख ने उस समय सिख नरसंहार के समर्थन में लेख लिखा था और सब जानते हैं कि संघियों ने उसमें भूमिका निभाई थी। वे कब माफ़ी मांगेंगे? और किस किस बात के लिये … आज़ादी की लडाई के दौरान अंग्रेज़ों का साथ देने के लिये? गांधी की हत्या के लिये?

और रहा सवाल कम्यूनिस्टों का- तो 1942 के लिये ख़ुलेआम माफ़ी मांगी गयी। चीन के साथ हुई लडाई मे तमाम देशी विदेशी विद्वानों का मानना है कि हमला भरत ने नहीं चीन ने किया था।

हां अब उत्तर तभी दूंगा जब यह एनानिमस नहीं होगा!